bahushalini

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Sunday, January 27, 2008

अमेरिकियों को चाइनीज नहीं, मेड इन इंडिया चाहिए

अधिकतर अमेरिकी भारत में बने प्रॉडक्ट्स की खरीदारी के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन चीन में बने प्रॉडक्ट्स के साथ ऐसी बात नहीं है। अमेरिका की बिजनेस मैगजीन 'फॉर्चून' के एक सर्वे में शामिल अमेरिकी नागरिकों में करीब 57 फीसदी ने कहा है कि वे मेड इन चाइना प्रॉडक्ट्स खरीदना कम ही पसंद करेंगे।
गौरतलब है कि खिलौना बनाने वाली कंपनी मैटल व कुछ और अमेरिकी कंपनियों ने चीन से मंगाए गए प्रॉडक्ट्स लौटा दिए थे। इसकी वजह यह थी कि उन प्रॉडक्ट्स में खतरनाक लेड की मात्रा काफी ज्यादा थी। सर्वे में शामिल लगभग 52 फीसदी लोगों ने कहा कि अगर प्रॉडक्ट भारत में बना हो तो इस तरह की घटना के कारण उस प्रॉडक्ट की खरीदारी का हमारा फैसला बदलेगा नहीं। सर्वे में सिर्फ 35 प्रतिशत लोगों ने ही कहा कि वे भारत में बने प्रॉडक्ट्स को खरीदना 'कम ही' पसंद करेंगे। वहीं 11 फीसदी ने कहा कि हम मेड इन इंडिया प्रॉडक्ट्स खरीदा करेंगे, इसकी संभावना 'ज्यादा' है। वैसे, चीन के प्रॉडक्ट्स खरीदने की 'ज्यादा' संभावना जताने वाले लोग भी 11 फीसदी ही थे। करीब 30 फीसदी लोगों ने कहा कि हमारे लिए इस बात का कोई मतलब नहीं कि प्रॉडक्ट चीन का है या नहीं।
फॉर्चून मैगजीन ने 14 से 16 जनवरी के बीच 1,000 वयस्कों के बीच यह सर्वे किया था। मैगजीन का कहना है कि चीन को छोड़कर अमेरिकी लोगों की खरीदारी में यह बात मायने नहीं रखती कि प्रॉडक्ट कहां का बना है। पांच में से तीन अमेरिकी अगर यह जान लें कि प्रॉडक्ट चीन में बना है तो वे उस प्रॉडक्ट को खरीदेंगे, इस बात की संभावना कम हो जाती है। लेकिन कई दूसरे जगहों के प्रॉडक्ट्स के बारे में यह बात ज्यादा महत्व नहीं रखती।

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