शरीर के बाल बताएंगे अपराधियों का पता
अब झूठ बोलने वाले अपराधियों की खैर नहीं। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक ईजाद कर ली है, जिससे किसी भी व्यक्ति की गातिविधियों की
जानकारी उसके शरीर के बाल दे देंगे। दरअसल, हर जगह की आबोहवा के अपने आइसोटोप्स होते हैं, जो सांस लेने, पानी पीने और खाना खाने के साथ शरीर में चले जाते हैं। बाद में ये बालों के बढ़ने के साथ उनमें प्रवेश कर जाते हैं। इन्हीं आइसोटोप्स के माध्यम से यह नई तकनीक अपराधियों की जानकारी मुहैया कराएगी। इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल आर्कियॉलजिस्ट यानी पुरातत्ववेत्ता जमीन में गड़ी प्राचीन चीजों के बारे में जानने के लिए करते हैं। ब्रिटेन की रीडिंग यूनिवर्सिटी के फॉरेन्सिक विभाग के सीनियर डॉक्टर स्टूअर्ट ब्लैक इस तकनीक का इस्तेमाल पहले भी कर चुके हैं। उन्होंने इस तकनीक से पुलिस को लाशों की शिनाख्त करने में मदद की थी। डॉ. ब्लैक के मुताबिक पृथ्वी की हर जगह की आबोहवा का अपना आइसोटोप होता है। आमतौर पर लोग किसी भी जगह जाकर वहीं का पानी और खाना इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनके शरीर में वहां के आइसोटोप प्रवेश कर जाते हैं। अगर कोई बंद बोतल के पानी का इस्तेमाल करता है, तो भी खाने में मौजूद नाइट्रोजन और कार्बन जानकारी देने के लिए काफी हैं। यही नहीं हर जगह हवा में मौजूद सीसा भी उस जगह का सुराग दे सकता है। उन्होंने कहा कि सभी तत्वों के आइसोटोप्स से मिली जानकारी को इकट्ठा करें तो किसी अपराधी के बारे में ठोस सूचना जुटाई जा सकती है। इस सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए फिलहाल ब्रिटेन का आइसोटोप मैप बनाया जा रहा है। पूरी दुनिया का इस तरह का मैप बन जाने पर इसमें काफी मदद मिल सकती है।
जानकारी उसके शरीर के बाल दे देंगे। दरअसल, हर जगह की आबोहवा के अपने आइसोटोप्स होते हैं, जो सांस लेने, पानी पीने और खाना खाने के साथ शरीर में चले जाते हैं। बाद में ये बालों के बढ़ने के साथ उनमें प्रवेश कर जाते हैं। इन्हीं आइसोटोप्स के माध्यम से यह नई तकनीक अपराधियों की जानकारी मुहैया कराएगी। इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल आर्कियॉलजिस्ट यानी पुरातत्ववेत्ता जमीन में गड़ी प्राचीन चीजों के बारे में जानने के लिए करते हैं। ब्रिटेन की रीडिंग यूनिवर्सिटी के फॉरेन्सिक विभाग के सीनियर डॉक्टर स्टूअर्ट ब्लैक इस तकनीक का इस्तेमाल पहले भी कर चुके हैं। उन्होंने इस तकनीक से पुलिस को लाशों की शिनाख्त करने में मदद की थी। डॉ. ब्लैक के मुताबिक पृथ्वी की हर जगह की आबोहवा का अपना आइसोटोप होता है। आमतौर पर लोग किसी भी जगह जाकर वहीं का पानी और खाना इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनके शरीर में वहां के आइसोटोप प्रवेश कर जाते हैं। अगर कोई बंद बोतल के पानी का इस्तेमाल करता है, तो भी खाने में मौजूद नाइट्रोजन और कार्बन जानकारी देने के लिए काफी हैं। यही नहीं हर जगह हवा में मौजूद सीसा भी उस जगह का सुराग दे सकता है। उन्होंने कहा कि सभी तत्वों के आइसोटोप्स से मिली जानकारी को इकट्ठा करें तो किसी अपराधी के बारे में ठोस सूचना जुटाई जा सकती है। इस सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए फिलहाल ब्रिटेन का आइसोटोप मैप बनाया जा रहा है। पूरी दुनिया का इस तरह का मैप बन जाने पर इसमें काफी मदद मिल सकती है।
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